नई दिल्ली, 5 जनवरी : दिल्ली दंगों के मामले में एक ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने आज उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने न केवल जमानत पर रोक लगाई, बल्कि उन्हें अगले एक साल तक नई याचिकाएं दायर करने से भी रोक दिया। हालांकि, अदालत ने इसी मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और शिफाउर रहमान सहित पांच अन्य लोगों को सशर्त जमानत दे दी।
दोनों आरोपी कितने समय से जेल में हैं?
उमर खालिद: 13 सितंबर, 2020 से हिरासत में, शारजील इमाम: 28 जनवरी, 2020 से जेल में हैं। दोनों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काने की साजिश रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने इन हिंसक घटनाओं को सीएए के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एक गहरी साजिश बताया है। दोनों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
शरजील इमाम पर आरोप
चिकन नेक कॉरिडोर : अदालत में एक वीडियो पेश किया गया जिसमें कथित तौर पर शरजील ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ को अवरुद्ध करने और असम को भारत से अलग करने की बात कर रहे हैं।
दिल्ली चक्का जाम: उस पर दिल्ली में चक्का जाम लगाकर दूध और सब्जियों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को अवरुद्ध करने की योजना बनाने का भी आरोप है।
उमर खालिद के खिलाफ आरोप
पुलिस का दावा है कि खालिद के भाषणों ने हिंसा भड़काने में मदद की। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने 2016 के जेएनयू विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया और आरोप लगाया कि खालिद ने ‘भारत तेरे टुकड़े-टुकड़े होंगे’ जैसे नारे लगाए थे।
फरवरी 2020 में हुए दंगों में कई लोगों की जान चली गई और घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों को व्यापक क्षति पहुंची। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव बढ़ने के बाद हिंसा शुरू हुई।
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