वॉशिंगटन/बर्लिन, 4 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका स्पेन के साथ अपने सभी व्यापारिक संबंध समाप्त कर देगा। यह फैसला स्पेन द्वारा अमेरिकी सेना को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार करने के बाद लिया गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित मिशनों के लिए स्पेन के सैन्य अड्डों का उपयोग करना चाहता था, लेकिन स्पेन ने इसकी मंजूरी नहीं दी।
जर्मन चांसलर से मुलाकात के दौरान बयान
जर्मन चांसलर के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि स्पेन का रवैया “बहुत खराब” रहा है। उन्होंने अपने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को स्पेन के साथ हर तरह के व्यापारिक लेन-देन बंद करने के निर्देश दिए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अब स्पेन के साथ कोई संबंध नहीं रखना चाहते। इस बयान से यूरोप और अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
शेयर बाजारों में मची हलचल
अमेरिका द्वारा स्पेन से व्यापार खत्म करने की घोषणा के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। स्पेन के स्टॉक मार्केट से जुड़े MSCI Spain ETF में लगभग 5.6% की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल स्पेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के रिश्तों में बड़ी दरार आ सकती है।
वैश्विक मंदी का खतरा
आर्थिक जानकारों के अनुसार यदि यह व्यापारिक टकराव बढ़ता है तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी (Recession) की ओर बढ़ सकती है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी, जिसका असर कई देशों पर पड़ेगा।
भारत पर संभावित प्रभाव
अमेरिका-यूरोप तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिससे भारत में आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में जारी तनाव और इस नए व्यापारिक विवाद के चलते कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इससे भारत के बजट और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार में भी निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है और पूंजी बाजार में गिरावट देखी जा सकती है।
भारत के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों दोनों के साथ संतुलन बनाए रखना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।
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