नई दिल्ली, 5 जनवरी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के प्रति कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका की मदद नहीं करता है, तो भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ (कर) और बढ़ाए जा सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता चल रही है। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अगर भारत रूसी तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो अमेरिका भारत से आने वाली वस्तुओं पर मौजूदा टैरिफ बढ़ा सकता है। ट्रंप का इशारा भारत और रूस के बीच तेल व्यापार की ओर था, जिसका ट्रंप प्रशासन लंबे समय से विरोध करता रहा है।
ट्रंप का कड़ा रुख
ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि अगस्त 2025 में इसी मुद्दे पर भारत पर टैरिफ दोगुना करके 50% कर दिया गया था। अमेरिका का आरोप है कि रूस के तेल राजस्व का इस्तेमाल यूक्रेन में किया जा रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर वे रूसी तेल मुद्दे पर मदद नहीं करते हैं, तो हम भारत पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम लिया। उन्होंने पीएम मोदी को एक अच्छा इंसान बताया और कहा कि मोदी जानते थे कि अमेरिकी राष्ट्रपति खुश नहीं हैं। व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक ऑडियो में ट्रंप को यह कहते हुए सुना गया, “वह (पीएम मोदी) जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश रहना ही था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”
भारत की प्रतिक्रिया
ट्रंप की ये ताज़ा टिप्पणी उस दावे के कुछ महीनों बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। अक्टूबर में ट्रंप ने कहा था, “अब तेल का कोई व्यापार नहीं होगा। वे तेल नहीं खरीद रहे हैं।” यह बयान 50% टैरिफ लागू होने के कुछ ही हफ्तों बाद आया था। हालांकि, भारतीय सरकार ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी। भारत लगातार कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति बाजार की स्थितियों और भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुसार तय की जाती है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव
ट्रंप की नई चेतावनी के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ने की संभावना है। हालांकि, टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ नरमी भी देखने को मिली थी। ट्रंप ने तब कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी के हमेशा मित्र रहेंगे और दोनों देशों के बीच एक विशेष संबंध है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी उस समय ट्रंप के बयान की सराहना की थी। इसके बावजूद, रूस से तेल खरीद का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि भारत सस्ते दामों पर रूसी तेल खरीदकर मुनाफा कमा रहा है।
यह भी देखें :

More Stories
कोरोना काल में रद्द हुई शादी की बुकिंग: रिज़ॉर्ट को ब्याज समेत लौटानी होगी रकम
एक जख्म ने खोला 20 साल पुराना राज, कमर में फंसी थी गोली
पाकिस्तान ने ट्रंप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने की गुहार लगाई थी