नई दिल्ली, 6 अगस्त : आज आरबीआई यानी भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति की बैठक (RBI MPC Meeting) के फैसले की घोषणा करेगा। इस बैठक के फैसले का सभी को बेसब्री से इंतजार है। लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या ट्रंप के टैरिफ के बीच आरबीआई फिर से रेपो रेट में कटौती करके आम आदमी को राहत दे सकता है।
गौरतलब है कि इस साल आरबीआई तीन बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है। अब तक आरबीआई ने पहली और दूसरी बैठक में रेपो रेट में 0.25 फीसदी और तीसरी बैठक यानी जून में 0.50 फीसदी की कटौती की थी। हालांकि, अब माना जा रहा है कि इस बार कोई कटौती नहीं की जाएगी। लेकिन यह रेपो दर क्या है और इसका आम आदमी से क्या संबंध है?
रेपो दर क्या है?
देश का केंद्रीय बैंक हर साल दो महीने के अंतराल पर मौद्रिक समिति की बैठक आयोजित करता है। इस बैठक में रेपो रेट और अन्य वित्तीय संबंधी फैसले लिए जाते हैं। लेकिन सबकी निगाहें खास तौर पर रेपो रेट पर होती हैं। क्योंकि रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
रेपो रेट की मदद से RBI मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। यह वह दर है जिस पर कोई वाणिज्यिक बैंक रिज़र्व बैंक से उधार लेता है। यह ऋण अल्पावधि के लिए होता है। रेपो रेट का आम आदमी पर क्या असर होगा? अगर बैंक को ऋण महंगा लगता है या रेपो रेट बढ़ता है, तो आम आदमी के लिए ब्याज दर भी बढ़ जाएगी। इसी तरह, अगर रेपो रेट कम होता है, तो आम आदमी के लिए ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा। सरल शब्दों में, रेपो रेट में कमी से ऋण पर ब्याज दर भी कम हो जाएगी। हालाँकि, यह ज़रूरी नहीं है, यह आपके बैंक पर भी निर्भर करता है।
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