काबुल/इस्लामाबाद, 9 नवम्बर : अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। दोनों पक्ष सीमा पर तनाव कम करने और एक नाज़ुक युद्धविराम को बनाए रखने के उद्देश्य से हुई बातचीत के विफल होने के लिए एक-दूसरे को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। हाल के हफ़्तों में सीमा पर हुई भीषण लड़ाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
इस संघर्ष में दर्जनों सैनिक और नागरिक मारे गए। 9 अक्टूबर को काबुल में हुए विस्फोटों के बाद हिंसा भड़क उठी। अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान द्वारा किए गए ड्रोन हमलों को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया और बदला लेने की कसम खाई। 19 अक्टूबर को कतर द्वारा युद्धविराम की मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव कम हुआ।
हमें अपनी रक्षा करने का अधिकार : मुजाहिद
अफ़ग़ान सरकार के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने वार्ता टूटने के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, “शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान की माँगें अनुचित थीं और वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी, बैठक समाप्त हो गई और वार्ता फिलहाल स्थगित है।” शनिवार को दक्षिणी अफ़ग़ान शहर कंधार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुजाहिद ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान (क्षेत्र में) असुरक्षा नहीं चाहता और युद्ध में शामिल होना हमारी पहली पसंद नहीं है। मुजाहिद ने कहा, “अगर युद्ध शुरू होता है, तो हमें अपनी रक्षा करने का अधिकार है।”
इससे पहले, उन्होंने एक लिखित बयान में दोहराया कि अफगानिस्तान ‘किसी को भी किसी अन्य देश के खिलाफ अपनी धरती का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा, न ही वह ऐसी किसी कार्रवाई की अनुमति देगा जो उसकी संप्रभुता या सुरक्षा को कमजोर करती हो।’
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