विनीपेग, 17 अप्रैल : कनाडा के मैनिटोबा प्रांत में हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कुशल कामगारों को 2026 तक अपना कानूनी दर्जा खोने का खतरा मंडरा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर पिछले तीन दिनों से मैनिटोबा विधानसभा भवन के बाहर अस्थायी विदेशी कामगारों और अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट्स द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने अपने वर्क परमिट की अवधि समाप्त होने और भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पंजाबी युवा शामिल
प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या पंजाब से गए युवाओं की है, क्योंकि मैनिटोबा में पंजाबी समुदाय काफी बड़ा है। ये छात्र और कामगार विभिन्न उद्योगों में अहम योगदान दे रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें वापस न भेजा जाए, क्योंकि वे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस साल कई लोगों के वर्क परमिट खत्म हो रहे हैं और यदि समय पर विस्तार नहीं मिला तो उन्हें मजबूरन वापस लौटना पड़ेगा। उन्होंने संघीय सरकार से तुरंत वर्क परमिट बढ़ाने की मांग की है।
उद्योगों पर भी पड़ सकता है असर
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कनाडा के कई व्यवसाय अंतरराष्ट्रीय श्रमिकों पर निर्भर हैं। ऐसे में वर्क परमिट खत्म होने से न सिर्फ कामगारों, बल्कि कर्मचारियों को बनाए रखने की कोशिश कर रहे नियोक्ताओं के लिए भी मुश्किलें बढ़ेंगी। मैनिटोबा की इमिग्रेशन मंत्री मलाया मार्सेलीनो ने प्रांत के लिए आवंटन 4,750 से बढ़ाकर 6,239 करवाया था, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार की कटौती के कारण कई आवेदकों को प्राथमिकता नहीं मिल पा रही।
मंत्री मिंटू संधू ने बताया कि राज्य सरकार ने कई बार संघीय सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। जनवरी तक मैनिटोबा में करीब 80,000 अस्थायी निवासी थे। मौजूदा स्थिति में बड़ी संख्या में लोग अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, जिससे उनके भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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