नई दिल्ली, 10 नवम्बर : गम हो या खुशी, हम अक्सर गाने सुनते हैं… लगभग हर भावना गानों के ज़रिए व्यक्त होती है। कई बार गाने हमारे लिए थेरेपी का काम करते हैं। हिंदी हो, अंग्रेजी हो या कोई और भाषा, संगीत एक ऐसा माध्यम है जो लोगों को सीधे उनके दिलों से जोड़ता है, लेकिन अगर हम आपसे कहें कि एक गाना ऐसा भी बना जिसे अशुभ कहा गया, तो क्या आप यकीन करेंगे? जी हाँ, आज हम आपको एक ऐसे गाने के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने कई लोगों की जान ले ली।
इस गाने को सुनते हुए 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई
दरअसल, यह गाना 1933 में आया था। रेज़सो सेरेस नाम के एक मशहूर हंगेरियन संगीतकार ने ‘ग्लूमी संडे’ नाम का एक गाना लिखा था। हालाँकि, यह गाना 1935 में आया था। इस गाने के लिखे जाने के पीछे एक अलग कहानी है। दरअसल, रेज़सो सेरेस ने यह गाना तब लिखा था जब उनका अपनी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया था और वह उन्हें छोड़कर चली गई थी। इसके बोल बहुत ही दुखद थे।
जिसने भी यह गाना सुना, वह बेहद दुखी हुआ। इसके बोल दिल दहला देने वाले थे। कहा जाता है कि इसके रिलीज़ होने के कुछ ही दिनों के भीतर लोगों ने आत्महत्याएँ शुरू कर दीं, जिससे इसे “हंगेरियन सुसाइड सॉन्ग” का उपनाम मिला। कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि इसे सुनने के बाद लगभग 100 लोगों ने अपनी जान ले ली। 1935 में, एक मोची ने यह गाना सुनकर आत्महत्या कर ली, और उसके सुसाइड नोट में “ग्लूमी संडे” के बोल पाए गए। यह सिलसिला जारी रहा।
अपनी प्रेमिका के बाद गायक ने भी की आत्महत्या
इस गाने के लेखक रेज़ो सेरेस ने भी आत्महत्या कर ली थी। हैरानी की बात यह है कि इसी गाने को सुनने के बाद सेरेस की प्रेमिका ने भी आत्महत्या कर ली थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गायक ने अपनी मौत के लिए वही दिन चुना, जिसका ज़िक्र उन्होंने अपने गाने में किया था। सेरेस ने जनवरी 1968 में बुडापेस्ट में आत्महत्या कर ली थी। हालाँकि वह एक खिड़की से कूदकर बच गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने अस्पताल में एक तार से गला घोंटकर आत्महत्या कर ली।
यह गाना इतना भयानक क्यों था?
जब इस गाने को सुनने के बाद इतनी सारी जानें चली गईं, तो इसके बोलों की जाँच की गई ताकि पता लगाया जा सके कि इसमें ऐसा क्या था जो लोगों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर रहा था। जाँच से पता चला कि यह गाना हंगेरियन भाषा में था और ऐसे समय में रिलीज़ हुआ था जब हंगरी आर्थिक तंगी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। लोग पहले से ही अवसाद और तनाव से जूझ रहे थे, और इसी दौरान “ग्लूमी संडे” नाम का यह गाना आया, जिसने लोगों की ज़िंदगी में और भी दुख भर दिया। इस गाने में ज़िंदगी की निराशा, युद्ध, गरीबी और अकेलेपन को दर्शाया और बयां किया गया था। इस गाने को सुनने के बाद लोग इससे जुड़ गए और फिर अपनी जान ले ली।

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