नई दिल्ली, 26 दिसम्बर : भारत सरकार डिजिटल दुनिया में धोखेबाजों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब तक अगर कोई स्कैमर वॉट्सऐप पर ब्लॉक होता था, तो वह टेलीग्राम या स्नैपचैट जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर लोगों को अपना शिकार बना लेता था, लेकिन जल्द ही यह रास्ता बंद हो जाएगा।
“एक प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक, हर जगह ब्लॉक”
सरकार एक ऐसा यूनिफाइड ब्लॉकिंग सिस्टम लाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत यदि कोई यूज़र किसी प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक होता है, तो उसे पूरे डिजिटल इकोसिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। इस योजना के तहत, वॉट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स उन मोबाइल नंबरों की सूची सरकार के साथ साझा करेंगे जिन्हें धोखाधड़ी या नियमों की उल्लंघना के कारण ब्लॉक किया गया है। इसके बाद टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसी ऐप्स भी इन्हें अपने आप ब्लॉक कर सकेंगी।
सिम बाइंडिंग होगी अनिवार्य
स्कैमर अक्सर OTP लेकर अकाउंट बनाते हैं और फिर सिम कार्ड निकाल देते हैं, जिससे उनका ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इसे रोकने के लिए सरकार सिम बाइंडिंग को अनिवार्य करने जा रही है। इस नियम के बाद यदि आपके फोन में एक्टिव सिम नहीं होगा, तो आप वॉट्सऐप या अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इससे किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में अपराधी की लोकेशन और पहचान तुरंत ट्रैक की जा सकेगी।
नियम की आवश्यकता क्यों पड़ी?
वॉट्सऐप की मासिक रिपोर्ट के अनुसार हर महीने लाखों शक़ी अकाउंट्स ब्लॉक किए जाते हैं, लेकिन साइबर अपराध कम नहीं हो रहे। अपराधी एक ऐप से ब्लॉक होने के बाद दूसरी ऐप पर शिफ्ट हो जाते हैं। सरकार का मानना है कि प्लेटफॉर्म्स के बीच तालमेल से ही साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।
इस कदम से डिजिटल धोखाधड़ी पर नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है और यूज़र्स की सुरक्षा बढ़ेगी।
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