March 2, 2026

मध्य पूर्व में तनाव से तेल की कीमतों में उछाल, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम

मध्य पूर्व में तनाव से तेल की कीमतों में...

न्यूयॉर्क, 2 मार्च : अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। बढ़ते तनाव के कारण सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र

Strait of Hormuz, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों ने निर्यात को सीमित कर दिया है। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 7.3% बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।

ब्रेंट क्रूड 7.8% की तेजी के साथ 78.55 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ

माहिरों के अनुसार यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो आम लोगों को पेट्रोल पंप से लेकर किराने के सामान तक हर चीज के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ता है।

तेल संकट की आशंका को देखते हुए OPEC+ के आठ सदस्य देशों, जिनमें सऊदी अरब और रूस शामिल हैं, ने रविवार को कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। अप्रैल से प्रतिदिन 2,06,000 बैरल अतिरिक्त उत्पादन करने की योजना बनाई गई है।

आपूर्ति मार्ग सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती तेल आपूर्ति के मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना है। यदि खाड़ी देशों से तेल निर्यात के रास्ते बाधित रहे, तो अतिरिक्त उत्पादन के बावजूद कीमतों को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। खासकर चीन जैसे बड़े आयातक देशों को अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा और अस्थिरता बढ़ सकती है।

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