तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, 4 मार्च : इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ी गई जंग चौथे दिन भी जारी रही। बढ़ते सैन्य टकराव के कारण वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।
मिसाइल लॉन्चरों और परमाणु केंद्र पर हमले
इज़राइल ने दावा किया है कि उसने मंगलवार को ईरानी मिसाइल लॉन्चरों और एक परमाणु अनुसंधान केंद्र पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। इन हमलों से ऊर्जा आपूर्ति और हवाई यात्रा प्रभावित हुई है।
भारी जनहानि
जंग के चार दिनों में ईरान में लगभग 800 लोगों की मौत की खबर है। इज़राइल की ओर से भी 11 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। संघर्ष के दौरान ईरान ने इज़राइल पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, हालांकि अधिकांश को इज़राइली रक्षा प्रणाली ने बीच में ही निष्क्रिय कर दिया। लेबनान में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जहां इज़राइल ने कहा कि उसने हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है।
ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह जंग कई सप्ताह या उससे भी अधिक समय तक चल सकती है। शुरुआती हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबर सामने आई थी। हालांकि ट्रंप ने पहले ईरान की जनता से अपनी सरकार के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की थी, लेकिन बाद में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासन परिवर्तन उनका आधिकारिक लक्ष्य नहीं है।
क्या हैं युद्ध के उद्देश्य?
अमेरिकी प्रशासन ने कई उद्देश्य गिनाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करना
- उसकी नौसैनिक ताकत को कमजोर करना
- उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना
- सहयोगी सशस्त्र समूहों को उसकी मदद बंद कराना
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। युद्ध की अनिश्चितता के चलते एशिया, यूरोप और अमेरिका के शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई है। निवेशकों में भय का माहौल है और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुझान बढ़ा है।
कब और कैसे खत्म होगी जंग?
विश्लेषकों का मानना है कि संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह स्पष्ट नहीं है कि यह कब और कैसे समाप्त होगा। यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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