नई दिल्ली, 4 मार्च : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच कतर ने अपने एलएनजी (LNG) प्लांटों पर हुए हमलों के बाद गैस उत्पादन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ईरान के ड्रोन हमलों के चलते दुनिया के सबसे बड़े गैस प्लांट को निशाना बनाए जाने की खबर है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के कारण भारतीय जहाज भी कतर नहीं जा पा रहे हैं।
भारत की 40% गैस सप्लाई पर संकट
भारत अपनी कुल गैस जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कतर से आयात करता है। सप्लाई रुकने से देश के कई उद्योगों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को 40 प्रतिशत तक की कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के चलते गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। इसका सीधा असर सीएनजी (CNG) वाहन चालकों और घरों में पाइप से गैस इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
पेट्रोनेट LNG और कतर एनर्जी के बीच नोटिस
भारत की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी Petronet LNG ने कतर की सरकारी कंपनी QatarEnergy को सूचित किया है कि मौजूदा युद्ध हालात में वह अपने जहाज वहां भेजने में असमर्थ है। दूसरी ओर, कतर एनर्जी ने भी आपूर्ति बाधित होने को लेकर नोटिस जारी किया है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
गैस कंपनियों ने भारत सरकार को पत्र लिखकर इस संकट पर चिंता जताई है और मांग की है कि आम लोगों और उद्योगों को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो इसका असर न केवल ऊर्जा क्षेत्र बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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