March 6, 2026

युद्ध में हर घंटे जल रहे 4 करोड़ डॉलर, अमेरिका को सबसे ज्यादा नुकसान

युद्ध में हर घंटे जल रहे 4 करोड़ डॉलर...

नई दिल्ली, 6 मार्च : पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी युद्ध छठे दिन भी जारी है। समय बीतने के साथ यह संघर्ष और तेज होता जा रहा है, जिससे क्षेत्र के लगभग सभी देश किसी न किसी रूप में प्रभावित हो रहे हैं। युद्ध के दौरान रोज़ाना लाखों डॉलर के आधुनिक हथियार इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो वर्षों की मेहनत से बसे शहरों को कुछ ही पलों में तबाह कर रहे हैं।

फिलहाल इस युद्ध के जल्द खत्म होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। पिछले छह दिनों में अमेरिका के अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं, वहीं इज़राइल और ईरान की अर्थव्यवस्था को भी भारी झटका लगा है। दुबई, कतर, बहरीन और लेबनान तक तनाव का असर दिखाई दे रहा है।

हर घंटे 4 करोड़ डॉलर का नुकसान

सैन्य विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार इतने आधुनिक युद्ध में एक दिन का खर्च लगभग 50 से 100 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। यानी हर घंटे करीब 4 करोड़ डॉलर से अधिक की लागत आ रही है। इज़राइल के वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि युद्ध के कारण देश को हर सप्ताह लगभग 9.4 अरब शेकेल (करीब 3 अरब अमेरिकी डॉलर) का आर्थिक नुकसान हो सकता है।

अमेरिका को सबसे अधिक आर्थिक झटका

इस युद्ध की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लागत में असमानता है। अमेरिका और इज़राइल के पास दुनिया की अत्याधुनिक सैन्य तकनीक है, लेकिन इन हथियारों की कीमत बेहद ज्यादा है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका को करीब 77.9 करोड़ डॉलर खर्च करने पड़े थे। तीन दिनों के भीतर यह खर्च लगभग 1.24 अरब डॉलर तक पहुंच गया। अब अनुमान है कि अमेरिका को रोजाना लगभग 1 अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं।

हथियारों की कीमत में बड़ा अंतर

अमेरिकी पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलों की कीमत लगभग 10 से 30 लाख डॉलर तक होती है। इसके मुकाबले ईरान की एक औसत बैलिस्टिक मिसाइल की कीमत करीब 8 से 10 लाख डॉलर के बीच है। इसी तरह अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर है, जबकि ईरान का शाहिद ड्रोन केवल 30 से 50 हजार डॉलर में तैयार हो जाता है।

कुल लागत 210 अरब डॉलर तक पहुंचने की आशंका

मैगजीन फॉर्च्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध की कुल आर्थिक लागत अमेरिका के लिए 210 अरब डॉलर (करीब 19 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। इसमें लगभग 95 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष सैन्य खर्च भी शामिल है। इसके अलावा वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और वित्तीय व्यवस्था पर पड़ने वाले बड़े प्रभाव के कारण होने वाला आर्थिक नुकसान भी इस अनुमान में जोड़ा गया है।

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