March 15, 2026

पंजाब में 71% शराब ठेकों का नवीनीकरण, बाकी के लिए सरकार लाएगी टेंडर

पंजाब में 71% शराब ठेकों का नवीनीकरण...

जालंधर/चंडीगढ़, 15 मार्च : Punjab सरकार की वर्ष 2026–27 की आबकारी नीति के तहत शराब ठेकेदारों को इस बार 6–7 प्रतिशत राजस्व वृद्धि के साथ अपने ठेकों के समूहों को नवीनीकरण (रिन्यू) करने का विकल्प दिया गया था। अब तक राज्य के करीब 71 प्रतिशत ठेकेदारों ने अपने ठेकों का नवीनीकरण करवा लिया है, जबकि बाकी 29 प्रतिशत ठेकों की अलॉटमेंट के लिए सरकार अब टेंडर प्रणाली अपनाएगी।

बचे हुए ठेकों के लिए लगेगा टेंडर

सरकार शेष ठेकों के लिए टेंडर जारी करेगी। यदि पुराने या नए ठेकेदार टेंडर में आवेदन करते हैं तो उसी आधार पर अलॉटमेंट किया जाएगा। यदि पर्याप्त आवेदन नहीं आते हैं तो सरकार को दोबारा टेंडर निकालते समय रिजर्व प्राइस कम करनी पड़ सकती है, ताकि ठेके आवंटित किए जा सकें। ठेकेदारों के अनुसार Barnala, Faridkot, Fatehgarh Sahib, Gurdaspur, Mansa, Patiala और Tarn Taran जिलों में सभी समूहों का पूरा नवीनीकरण हो चुका है।

वहीं अन्य जिलों में नवीनीकरण की स्थिति इस प्रकार है:

  • Ludhiana – 73%
  • Jalandhar – 76%
  • Amritsar – 75%

जबकि कुछ जिलों में यह प्रतिशत काफी कम रहा:

  • Hoshiarpur – 46%
  • Kapurthala – 43%
  • Moga – 40%

पिछले साल के नुकसान से ठेकेदार परेशान

ठेकेदारों का कहना है कि वर्ष 2025–26 में हुए भारी वित्तीय नुकसान के कारण इस बार कई लोगों ने नवीनीकरण से दूरी बनाई। उनके मुताबिक आईएमएफएल (अंग्रेजी शराब) के ओपन कोटा सिस्टम से बाजार में अंग्रेजी शराब की आपूर्ति काफी बढ़ गई, जिससे खुदरा ठेकेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हुई और मुनाफा घट गया। ठेकेदारों का कहना है कि ओपन कोटा नीति का सबसे ज्यादा फायदा शराब फैक्ट्रियों और डिस्टिलरी मालिकों को हुआ, जबकि खुदरा ठेकेदारों को कम मुनाफे और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।

नीति में बदलाव की मांग

ठेकेदारों ने सरकार से मांग की है कि आबकारी राजस्व को स्थिर बनाए रखने के लिए आईएमएफएल के ओपन कोटे की अलॉटमेंट पर सख्त नियंत्रण किया जाए। उनका कहना है कि यदि इस व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में कई और ठेकेदार कारोबार से बाहर हो सकते हैं।

उन्होंने सरकार से यह भी अपील की कि बाजार में मांग और आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखने के लिए आबकारी नीति में जरूरी सुधार किए जाएं, ताकि खुदरा ठेकेदारों को भी उचित मुनाफा मिल सके और राज्य के राजस्व पर नकारात्मक असर न पड़े।

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