ढाका, 31 मार्च : बांगलादेश में लगातार गतिविधियां बदल रही हैं, जहां देश में नए चुने गए तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान का दखल बढ़ता जा रहा है। पहले बांगलादेश में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों और सरकारी नौकरशाहों का दखल था अब पाकिस्तानी मौलानाओं के लिए भी बांगलादेश एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
भारत खिलाफ नकारात्मक सोच को बढ़ावा
हाल ही में, पाकिस्तान के पूर्व धार्मिक मंत्री सैयद हामिद सईद काजमी ने बांग्लादेश का दौरा किया, जो तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद बांग्लादेश की यात्रा करने वाले पाकिस्तान के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। काजमी 29 मार्च को ढाका पहुंचे और उसी दिन चटगांव के लिए रवाना हो गए। उनके इस दौरे के परिणामस्वरूप बांग्लादेश में भारत के प्रति नकारात्मक भावनाओं में वृद्धि होने की आशंका है। यह चिंता जताई जा रही है कि काजमी बांग्लादेशी कट्टरपंथियों को भारत के खिलाफ कथित जिहाद के लिए भड़काने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
सैयद हामिद सईद काजमी कौन हैं?
सैयद हामिद सईद काजमी पाकिस्तान के प्रमुख इस्लामी विद्वानों में से एक हैं, जिन्होंने 2008 से 2010 तक पाकिस्तान के 28वें संघीय मंत्री के रूप में धार्मिक मामलों का कार्यभार संभाला। वह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं, जिसका नेतृत्व बिलावल भुट्टो जरदारी कर रहे हैं। काजमी का संबंध मुल्तान से है, और उन्हें सुन्नी समुदाय में एक प्रतिष्ठित नेता के रूप में जाना जाता है।
अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने तालिबान और पाकिस्तान के अन्य चरमपंथी संगठनों के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज उठाई। सितंबर 2009 में, काजमी पर इस्लामाबाद में एक हमले का प्रयास किया गया, जिसमें वह और उनके सुरक्षा गार्ड घायल हो गए। इस घटना ने उनके साहस और प्रतिबद्धता को और भी उजागर किया, जो उन्होंने अपने देश और समुदाय की सुरक्षा के लिए दिखाई।
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