चंडीगढ़, 2 अप्रैल : भगवंत सिंह मान ने ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के तहत ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का चार साल का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर पंजाब के जायज फंड रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य अपने बकाये के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के वैध फंड रोके जा रहे हैं, जो राज्य के विकास में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार अपने अधिकारों के लिए हर मंच पर संघर्ष करेगी। मान ने मनरेगा में किए जा रहे बदलावों पर चिंता जताई और कहा कि इससे ग्रामीण रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार गरीबों और मजदूर वर्ग के साथ मजबूती से खड़ी है।
जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास को समग्र प्रगति का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए कहा कि सरकार ने गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, प्रशासन को जमीनी स्तर तक सशक्त बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।
मान ने बताया कि 1 अप्रैल से राज्य का पहला जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य सभी वर्गों के जीवन स्तर का आकलन कर नीतियों को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सर्वेक्षण की गोपनीयता पूरी तरह बरकरार रखी जाएगी।
पंचायत चुनावों में बढ़ी सर्वसम्मति
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2024 में 13,236 पंचायतों के चुनाव हुए, जिनमें 2,970 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं, जबकि 2018 में यह संख्या लगभग 1,870 थी। इससे गांवों में सामाजिक सौहार्द मजबूत हुआ है।
सरकार ने सरपंचों का मानभत्ता 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया है, जिससे स्थानीय नेतृत्व को प्रोत्साहन मिला है।
ग्रामीण विकास पर बढ़ा खर्च
मुख्यमंत्री ने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2025-26 में ग्रामीण विकास पर 2,367.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने हैं।
उन्होंने कहा कि 2017-22 के दौरान जहां 1,883 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं उनकी सरकार ने पिछले चार वर्षों में 3,847 करोड़ रुपये गांवों के विकास पर खर्च किए हैं।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी विकास के सिद्धांतों पर चलते हुए राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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