कपूरथला, 6 अप्रैल: पंजाब की ऐतिहासिक रियासतों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली नाभा रियासत की सम्मानित शख्सियत राजमाता दीर्घ कौर (कुमकुम) का देर रात निधन हो गया। उनके निधन से पंजाब के राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक वर्गों में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। राजमाता जी के निधन को केवल नाभा रियासत ही नहीं, बल्कि पूरे पंजाब की राजसी और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
उनकी शख्सियत में राजसी गरिमा, धार्मिक आस्था और मानवता के प्रति गहरी समर्पण भावना झलकती थी। राजमाता जी का जीवन बेहद सादगीपूर्ण था। वे केवल राजसी परिवारों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आम लोगों में भी उनके प्रति विशेष सम्मान था।
पारिवारिक और ऐतिहासिक संबंध
इस दुखद खबर की पुष्टि करते हुए कपूरथला रियासत के वंशज टिक्का शत्रुजीत सिंह ने बताया कि राजमाता जी के उनके परिवार के साथ पुराने और घनिष्ठ संबंध थे, जो पंजाब की विभिन्न रियासतों के ऐतिहासिक रिश्तों को दर्शाते हैं। राजमाता कुमकुम सिंह का निधन एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनका जीवन सेवा, मर्यादा और परंपराओं की एक मिसाल रहा है।
धार्मिक और सामाजिक योगदान
राजमाता जी का सिख धर्म से गहरा जुड़ाव था और वे विभिन्न धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं। गुरुद्वारों के प्रति उनकी आस्था और सेवा भावना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों के कल्याण के लिए कई प्रयासों को प्रोत्साहित किया।
राजमाता जी की आत्मा की शांति के लिए 7 अप्रैल 2026, मंगलवार को शाम 4 बजे से 5 बजे तक गुरुद्वारा दमदमा साहिब में कीर्तन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर राजसी परिवारों, धार्मिक नेताओं और सामाजिक हस्तियों के बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना है।

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