April 6, 2026

हाईकोर्ट का फैसला: माइनिंग माफिया से जुड़े अफसरों पर कार्रवाई के आदेश

हाईकोर्ट का फैसला: माइनिंग माफिया से जुड़े ...

चंडीगढ़, 6 अप्रैल: मोहाली जिले के ब्लॉक माजरी में लंबे समय से चल रही अवैध माइनिंग और क्रशर गतिविधियों के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को माइनिंग माफिया में शामिल सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का रुख करने की अनुमति दे दी है।

गांव अभीपुर के निवासी राम सिंह की अगुवाई में क्षेत्र के लोग वर्ष 2019 से इस अवैध माइनिंग के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस अवैध खनन के कारण राज्य सरकार को 1000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।

पर्यावरण को भारी नुकसान

हिमालय की पहाड़ियों के निचले हिस्से में बसे संवेदनशील “कांडी क्षेत्र” में 50 से 80 फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं। इससे प्राकृतिक नालों और वन क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंची है। बताया गया है कि इस इलाके में भूजल स्तर 150 फीट से गिरकर 500 फीट तक पहुंच गया है। दिन-रात चल रहे क्रशर और टिप्परों के कारण इलाके में वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

प्रशासन पर गंभीर आरोप

याचिकाकर्ताओं के वकील निखिल सराफ के अनुसार, वर्ष 2019-20 में NGT के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद मोहाली पुलिस ने माइनिंग रोकने के बजाय याचिकाकर्ताओं पर ही मामले दर्ज कर दिए। खिजराबाद से अभीपुर, मियानपुर और कुबाहेड़ी को जोड़ने वाली सड़क को भी अवैध रूप से खोद दिया गया। साथ ही मोहाली की पूर्व डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन पर अदालत में गलत हलफनामा देकर गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने अपने ताजा आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता अब माइनिंग विभाग, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डिप्टी कमिश्नर कार्यालय और मोहाली पुलिस के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं, जिन्होंने माइनिंग माफिया की मदद की। अदालत के आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा सकता है।