April 17, 2026

हिन्द महासागर में ऑस्ट्रेलिया का अहम रक्षा साझेदार बनेगा भारत

हिन्द महासागर में ऑस्ट्रेलिया का अहम...

नई दिल्ली, 17 अप्रैल : आज वैश्विक रक्षा समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपनी बहुप्रतीक्षित ‘राष्ट्रीय रक्षा रणनीति 2026’ जारी की। इस रणनीति में भारत को ‘टॉप-टियर’ सुरक्षा साझेदार का दर्जा देते हुए पूर्वोत्तर हिंद महासागर में उसका सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया गया है। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते शक्ति संतुलन को दर्शाता है।

छिपी हैं गहरी सुरक्षा चिंताएँ

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल औपचारिक कूटनीतिक बयान नहीं है, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर ऑस्ट्रेलिया अब भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है, जिसमें भारत एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरा है। नई रणनीति में पूर्वोत्तर हिंद महासागर को ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था की ‘शह रग’ बताया गया है। यही वह क्षेत्र है जहां से ऑस्ट्रेलिया के अधिकतर कच्चे तेल, गैस और कोयले के व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। इसलिए इन समुद्री व्यापार मार्गों (Sea Lines of Communication) की सुरक्षा ऑस्ट्रेलिया के लिए अत्यंत जरूरी हो गई है।

887 अरब डॉलर का विशाल रक्षा निवेश

ऑस्ट्रेलिया ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ‘इंटीग्रेटेड इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम (IIP)’ भी पेश किया है। इस कार्यक्रम के तहत 2036 तक लगभग 887 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 740 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए जाएंगे। यह निवेश वैश्विक स्तर पर रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़े दीर्घकालिक निवेशों में से एक माना जा रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। भारत के साथ सहयोग बढ़ाकर ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा, रक्षा साझेदारी और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करना चाहता है।

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