नई दिल्ली, 19 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत पक्के किए गए हजारों ठेका कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाएं जारी रखने का आदेश दिया है। अदालत ने 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की अधिसूचनाओं को वैध ठहराया है।
यह फैसला जस्टिस पी. एस. नरसिंहा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन अधिसूचनाओं का लाभ पाने के पात्र अन्य कर्मचारियों (इंटरवीनर्स) को भी राहत दी जाएगी, लेकिन पहले उनके दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया गया, जिसमें कुछ अधिसूचनाओं को अवैध बताया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 7 जुलाई 2014 की उन अधिसूचनाओं को “मनमानी और गैर-कानूनी” करार देते हुए रद्द कर दिया, जो ग्रुप ‘बी’, ‘सी’ और ‘डी’ कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ी थीं।
अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों को पहले ही इन अधिसूचनाओं के तहत नौकरी मिल चुकी है, उन्हें हटाया नहीं जाएगा। साथ ही निर्देश दिया गया कि उन्हें उनके पद के न्यूनतम वेतनमान पर रखा जाए।
अन्य प्रभावित कर्मचारियों को भी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसी तरह के अन्य प्रभावित एडहॉक कर्मचारी भी इस राहत के हकदार होंगे। हालांकि, लाभ देने से पहले संबंधित प्राधिकरण द्वारा उनके दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी।
यह फैसला न सिर्फ पहले से कार्यरत कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रभावित लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्याय मिले। अदालत ने अपने निर्णय में कानून के साथ-साथ मानवीय पहलुओं को भी प्राथमिकता दी है।

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