नई दिल्ली, 31 मार्च : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया, जो कि 2014 में सत्ता में आने के बाद उनका पहला ऐसा दौरा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने संगठन की सराहना की, जिसे बीजेपी और आरएसएस के बीच वैचारिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले वर्ष, दोनों संगठनों के बीच कुछ तनाव उत्पन्न हुआ था, लेकिन मोदी की यह यात्रा एक नई शुरुआत का संकेत देती है। लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सीटें न मिलने के बाद, बीजेपी और आरएसएस एकजुट होकर काम करने के लिए तत्पर हैं।
संघ से मतभेद को बताया सिर्फ अफवाह
प्रधानमंत्री मोदी का आरएसएस मुख्यालय में जाना कई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय रहा है, यहां तक कि आरएसएस के स्वयंसेवक भी इस पर चकित हैं। यह पूछे जाने पर की क्या संघ और बीजेपी में मतभेद थे तो इस सवाल को संघ नेता एच.वी. शेषेद्रि ने कहा यह केवल अफवाह है।
यह यात्रा दोनों संगठनों के बीच संबंधों को सुधारने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। मोदी के इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि वे संगठन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए गंभीर हैं, खासकर जब राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आ रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी ने कहा कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि संघ बीजेपी का वैचारिक मार्गदर्शक है। इस प्रकार, मोदी की यात्रा न केवल संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि वे भविष्य में एकजुटता के साथ आगे बढऩे के लिए तैयार हैं।
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