चंडीगढ़, 15 जुलाई 2026: स्ट्रोक किसी भी परिवार के जीवन में बिना किसी पूर्व चेतावनी के दस्तक देता है। एक क्षण पहले तक व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बातचीत कर रहा होता है और अपने दैनिक कार्य कर रहा होता है, लेकिन अगले ही पल मस्तिष्क की किसी धमनी में अवरोध या रक्त वाहिका फटने के कारण सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति में बदल सकता है।
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि यह योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर आधुनिक इमेजिंग, गहन चिकित्सा (आईसीयू) और दीर्घकालिक उपचार तक मस्तिष्क संबंधी आपात स्थितियों से जूझ रहे मरीजों को प्रभावी सहायता प्रदान कर रही है।
स्ट्रोक, जिसे सामान्यतः ‘ब्रेन अटैक’ कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह रुक जाता है अथवा कोई रक्त वाहिका फट जाती है। ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, तंबाकू का सेवन, मोटापा तथा अस्वस्थ जीवनशैली स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक आज भी विश्वभर में मृत्यु और स्थायी विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जिन्हें समय रहते जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखकर रोका जा सकता है।
वहीं, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार समय पर उपचार मिलने से मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है तथा रक्तचाप, मधुमेह और जीवनशैली संबंधी जोखिमों पर नियंत्रण रखकर स्ट्रोक की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्ट्रोक का उपचार अत्यंत महंगा हो सकता है, जिससे अनेक परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना करते हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का 4.15 करोड़ रुपये की लागत से कैशलेस उपचार किया गया। इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले शामिल रहे, जिनके उपचार पर 14.27 लाख रुपये व्यय किए गए।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का वास्तविक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक कठिनाइयों के कारण उपचार में देरी न करे।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार उपलब्ध हो। स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और आर्थिक सहायता उपचार में होने वाली देरी तथा जीवनरक्षक चिकित्सा के बीच निर्णायक अंतर पैदा कर सकती है।”
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