नई दिल्ली, 22 अप्रैल : उच्चतम न्यायालय आज मुर्शिदाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के निर्णयों के माध्यम से विधायी क्षेत्र में कथित हस्तक्षेप के लिए उनके खिलाफ टिप्पणियां की जा रही हैं। पश्चिम बंगाल के निवासी देवदत्त माझी और मणि मुंजाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की है।
हिन्दुओं पर बढ़ते हमले चिंता का विषय
उन्होंने इस महीने वक्फ या इस्लामी धर्मार्थ निधियों के विनियमन और प्रबंधन के लिए बनाए गए नए कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद हिंदुओं पर हुए कथित हमलों का हवाला दिया है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका का उल्लेख किया और अनुरोध किया कि इस पर 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में हुई हिंसा को देखते हुए पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग वाली लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई की जाए।
उप राष्ट्रपति धनखड़ और सुप्रीम कोर्ट के बीच तनातनी
पीठ की टिप्पणी उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की 8 अप्रैल के फैसले पर की गई टिप्पणी की संदर्भ में आई है, जिसमें राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की गई थी। धनखड़ ने सर्वोच्च न्यायालय को ‘सुपर संसद’ कहा और अनुच्छेद 142 के तहत उसके द्वारा प्रयोग की जाने वाली असाधारण शक्तियों को लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ ‘परमाणु मिसाइल’ बताया।
यह भी देखें : https://bharatdes.com/religion-should-not-be-used-for-cheap-popularity-rashmi-desai/

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