नई दिल्ली, 25 मार्च : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एन वी अंजारिया की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह अहम टिप्पणी की।
बेंच ने कहा कि अनुसूचित जाति से संबंधित कोई भी व्यक्ति यदि किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो वह तुरंत और पूरी तरह SC का दर्जा खो देता है। ऐसे व्यक्ति को संविधान या किसी कानून के तहत मिलने वाले आरक्षण, सुरक्षा या अन्य लाभ नहीं मिल सकते।
कानूनी लाभों का नहीं कर सकते दावा
अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 3 के तहत केवल निर्दिष्ट धर्मों के अनुयायी ही SC श्रेणी में आते हैं। अन्य धर्म अपनाने वाला व्यक्ति SC सदस्यता का दावा नहीं कर सकता और न ही उससे जुड़े किसी कानूनी लाभ का हकदार होगा। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को अपने फैसले में कहा था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाता है और उसका प्रचार करता है, तो उसे SC समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता।
SC-ST एक्ट का लाभ भी नहीं मिलेगा
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि चूंकि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है, इसलिए ऐसा व्यक्ति SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों का लाभ नहीं उठा सकता।यह मामला उस समय सामने आया जब एक व्यक्ति, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था, ने एक आपराधिक मामले में SC/ST एक्ट का हवाला दिया। हाई कोर्ट ने उसकी आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसके बाद पादरी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया।
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