नई दिल्ली, 13 दिसम्बर : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज एक एकल उच्च शिक्षा नियामक निकाय स्थापित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। यह यूजीसी और एआईसीटीई जैसे संस्थानों का स्थान लेगा। प्रस्तावित विधेयक का नाम विकसित भारत शिक्षा प्राधिकरण रखा गया है, जिसे पहले उच्च शिक्षा आयोग विधेयक के नाम से जाना जाता था। मंत्रिमंडल ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए एक विधेयक को भी मंजूरी दी।
30 लाख लोगों को शामिल किया जाएगा
सूत्रों के अनुसार, बीमा कानून संशोधन विधेयक 2025 को सोमवार को संसद में पेश किया जा सकता है। मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं, जिसमें पहली बार जाति गणना शामिल होगी। जनगणना कार्य में लगभग 30 लाख लोगों को शामिल किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने ऐसे 71 कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को भी मंजूरी दी है, जिनका महत्व समाप्त हो चुका है।
मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे में नहीं आएंगे
एक अधिकारी ने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित एकल उच्च शिक्षा नियामक का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईटीसी) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का स्थान लेना है। मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे में नहीं आएंगे। यूजीसी गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा क्षेत्र की देखरेख करता है, जबकि एआईसीटीई तकनीकी शिक्षा की देखरेख करता है और एनसीटीई शिक्षक शिक्षा से संबंधित संस्था है।
इसके तीन मुख्य कार्य विनियमन, मान्यता और व्यावसायिक मानक निर्धारण प्रस्तावित हैं। वित्तपोषण का कार्य प्रशासनिक मंत्रालय के पास ही रहेगा।
यह भी देखें : देश में पहली डिजिटल जनगणना 2027 में आयोजित की जाएगी

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