चंडीगढ़, 7 अप्रैल : धान (झोना) सीजन से पहले पंजाब सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी वार्षिक कृषि कार्य योजना (एक्शन प्लान) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कुल 1388 करोड़ रुपये के बजट में से लगभग 43 फीसदी हिस्सा यानी 600 करोड़ रुपये सिर्फ पराली प्रबंधन के लिए निर्धारित किए गए हैं। राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि यह एक्शन प्लान केंद्र के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेज दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को सब्सिडी पर मशीनरी उपलब्ध कराकर पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान करना है।
पराली जलाने के मामलों में आई बड़ी गिरावट
गौरतलब है कि साल 2025 के सीजन में पंजाब ने पराली जलाने की घटनाओं में 53 फीसदी की कमी दर्ज की। 2024 में घटनाएं: 10,909, 2025 में घटनाएं: 5,114 सरकार अब इस आंकड़े को और कम करने के लिए In-Situ (खेत में प्रबंधन) और Ex-Situ (खेत से बाहर प्रबंधन) तकनीकों पर जोर दे रही है। डूबते भूजल स्तर को बचाने के लिए ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ अभियान के तहत 33.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके जरिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा।
फसली विविधता को बढ़ावा
धान के चक्र से किसानों को बाहर निकालने के लिए सरकार मक्का, दालों और तिलहन की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए 50.30 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। प्राकृतिक खेती के लिए: 8.25 करोड़ रुपये, नरमा (कपास) की खेती और बीज सुधार के लिए: 51.85 करोड़ रुपये। सरकार का मुख्य लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण, पानी की बचत और किसानों की आय बढ़ाना है, ताकि खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सके।
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