वॉशिंगटन/जिनेवा, 23 जनवरी : अमेरिका आधिकारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग हो गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने संयुक्त बयान जारी कर पुष्टि की कि अमेरिका अब इस वैश्विक स्वास्थ्य संस्था का सदस्य नहीं रहा। इस ऐतिहासिक फैसले के प्रतीक के तौर पर स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा भी हटा दिया गया है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में WHO की गंभीर विफलताएं इस निर्णय की मुख्य वजह हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए WHO को दी जाने वाली सभी सरकारी सहायता और फंडिंग पर रोक लगा दी है। अमेरिका का दावा है कि WHO की नीतियों के कारण देश को पहले ही खरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है।
आगे क्या होगा?
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में WHO में दोबारा शामिल होने या ‘पर्यवेक्षक’ (Observer) के रूप में जुड़ने की उसकी कोई योजना नहीं है। अब अमेरिका बीमारियों की निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों के साथ सीधे सहयोग करेगा।
26 करोड़ डॉलर के बकाये पर विवाद
WHO का कहना है कि अमेरिका पर वर्ष 2024 और 2025 की सदस्यता फीस के रूप में करीब 26 करोड़ डॉलर (लगभग 2,100 करोड़ रुपये) का बकाया है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिकी जनता पहले ही अत्यधिक भुगतान कर चुकी है और संगठन से बाहर निकलने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। दूसरी ओर, कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी कानून का उल्लंघन हो सकता है।
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