नई दिल्ली, 26 जुलाई : भारत में बड़ी संख्या में लोग मधुमेह के शिकार हो रहे हैं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि इसके खतरों से निपटने में योग काफी मददगार साबित हो सकता है। रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि योग के नियमित अभ्यास से टाइप-2 मधुमेह के प्रति अतिसंवेदनशील लोगों में इसके विकसित होने का खतरा 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
वैज्ञानिक दृष्टी से भी योगा के कई लाभ
योग के माध्यम से टाइप-2 मधुमेह की रोकथाम का वैज्ञानिक रूप से दस्तावेजीकरण करने का यह पहला प्रयास है। इस शोध का उद्देश्य टाइप-2 मधुमेह की रोकथाम में योग की भूमिका का पता लगाना था, न कि केवल इसके प्रबंधन में। इसमें कुछ योग आसनों का भी उल्लेख किया गया है, जो इस संबंध में लाभकारी पाए गए हैं।
पिछले अधिकांश अध्ययनों ने मधुमेह से ग्रस्त लोगों पर ध्यान केंद्रित किया है, यह देखते हुए कि योग कैसे दवा या इंसुलिन पर उनकी निर्भरता को कम कर सकता है। इसके विपरीत, यह अध्ययन विशेष रूप से उन लोगों पर केंद्रित है जिन्हें इस बीमारी के विकसित होने का खतरा है, जैसे कि जिनके परिवार में मधुमेह का इतिहास है। यह यह भी देखता है कि क्या इसकी शुरुआत को पूरी तरह से रोका जा सकता है।
डायबिटीज रिपोर्ट में योग का महत्तव
रिपोर्ट को आगे की जांच के लिए प्रस्तुत कर दिया गया है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत भी इसी तरह का शोध चल रहा है, जहां यह अध्ययन किया जा रहा है कि योग जैसे पारंपरिक स्वास्थ्य उपाय निवारक और चिकित्सीय स्वास्थ्य परिणामों में कैसे योगदान दे सकते हैं।
यह अध्ययन दर्शाता है कि योग जैसी प्राचीन प्रथाओं का वैज्ञानिक परीक्षण करके वास्तविक स्वास्थ्य समाधान कैसे प्रस्तुत किए जा सकते हैं। यह निवारक स्वास्थ्य सेवा को मज़बूत करने और एक स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक कदम है।
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