नई दिल्ली, 2 अप्रैल : केंद्र सरकार दशकों पुराने वक्फ कानून को बदलना चाहती है, दलील है कि ये नया बिल वक्फ की संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल के लिए है। वहीं विरोध करने वालों का कहना है कि सरकार बिल में बदलाव के बहाने वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है।
केंद्रीय गृह मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि लोकसभा की बिजऩेस एडवाइजऱी कमेटी (बीएसी) की बैठक में चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय किया गया है, जिसे बढ़ाया भी जा सकता है। इससे पहले बिल को पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन भारी विरोध के बाद इसे संयुक्त संसदीय कमेटी को भेज दिया गया, जिसमें अलग-अलग दलों के तकरीबन 31 सांसद थे।
क्या क्या हुआ वक्फ पर अब तक
वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश करते हुए इसकी खूबियां गिनाई थी। किरेन रिजिजू ने संसद में कहा था, इस बिल के आने से किसी की भी धार्मिक आज़ादी में हस्तक्षेप नहीं होगा. यह बिल किसी का अधिकार लेने की बात नहीं करता है बल्कि इसे उन लोगों को अधिकार देने के लिए लाया जा रहा है, जिन्हें वक़्फ़ संबंधी अपने मामलों में अधिकार नहीं मिल पाता।
दरअसल, वक्फ संशोधन पर नया बिल, 1995 के वक़्फ़ एक्ट को संशोधित करने के लिए लाया गया है. इस बिल का नाम है यूनाइटेड वक्फ मैनेजमेंट एम्पॉवरमेंट, एफि़शिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट-1995 यानी उम्मीद। तकरीबन सभी विपक्षी पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही हैं. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में एक बयान में कहा था, ये संविधान के खिलाफ है और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।
यह भी देखें :https://bharatdes.com/bjp-orders-all-mps-to-be-present-in-parliament-wakf-bill-will-be-presented/

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