गुरदासपुर, 2 मार्च : रंजीत सिंह एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कथित मुठभेड़ में मारे गए रंजीत सिंह की माता सुखजिंदर कौर की शिकायत पर अदालत ने मामले से जुड़े पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और जीपीएस डिटेल्स सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने दाखिल की अर्जी
मामले की पैरवी कर रही कानूनी टीम में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अजय मरवाहा, एडवोकेट रवि दीप बदियाल और एडवोकेट भजनप्रीत सिंह (गुरदासपुर) शामिल हैं। इनकी ओर से अदालत में दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों के फोन नंबरों का विवरण जांच अधिकारी और सेवा प्रदाता टेलीकॉम कंपनी को सौंपने के निर्देश दिए।
अदालत ने एसएसपी गुरदासपुर, थाना प्रभारी दोरांगला, थाना प्रभारी पुराना शाला, सीआईए प्रभारी गुरमीत सिंह और मुठभेड़ में शामिल अन्य पुलिस कर्मियों के कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं। टेलीकॉम कंपनी को 20 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक की कॉल डिटेल्स और जीपीएस लोकेशन सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज भी होगी जांच का हिस्सा
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, यदि उपलब्ध हो, तो उसे सुरक्षित रखकर जांच का हिस्सा बनाया जाए। इसके साथ ही रंजीत सिंह के कॉल रिकॉर्ड भी संरक्षित करने के आदेश दिए गए हैं।
सीआईए इंचार्ज की मेडिकल जांच के आदेश
अदालत ने सीआईए इंचार्ज गुरमीत सिंह, जिन्हें मुठभेड़ के दौरान घायल दिखाया गया है, के मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के भी आदेश दिए हैं। एसएमओ गुरदासपुर को निर्देश दिए गए हैं कि डॉक्टरों का तीन सदस्यीय बोर्ड गठित कर विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट तैयार की जाए और उसे क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट को सौंपा जाए। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि गुरमीत सिंह की बांह पर लगी गोली स्वयं चली थी या किसी अन्य द्वारा चलाई गई थी।
अदालत के इन निर्देशों के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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