March 4, 2026

पंजाब पर कर्ज का बोझ 4 लाख करोड़ के पार

पंजाब पर कर्ज का बोझ 4...

चंडीगढ़, 4 मार्च : पंजाब सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच राज्य सरकार ने 20,769.63 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लिया, जिसके बाद कुल कर्ज बढ़कर 4.03 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अनुमान है कि चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 4.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। 31 मार्च 2025 तक पंजाब पर 3.83 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 44 प्रतिशत से अधिक बनता है।

पिछले वर्षों में लगातार बढ़ता रहा कर्ज

जब आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता संभाली थी, उस समय राज्य पर 2.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था। इससे पहले 2017-18 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान यह कर्ज 1.82 लाख करोड़ रुपये था।

2007-08 में पंजाब पर 55,982 करोड़ रुपये का कर्ज था, जबकि 1952 में संयुक्त पंजाब पर 78.31 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज था, जो 1964 तक बढ़कर 300 करोड़ रुपये हो गया। राज्य के अशांत दौर के दौरान कर्ज का जाल और फैला। केंद्र सरकार ने कुछ कर्ज माफी जरूर दी, लेकिन वह पर्याप्त नहीं थी।

विरासती कर्ज चुकाने में जा रहा 85% उधार

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वर्तमान में लिया जा रहा अधिकांश कर्ज पुराने कर्ज की अदायगी के लिए है। उन्होंने बताया कि नए कर्ज का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विरासती कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया गया है। सरकार अब तक मूल कर्ज का लगभग 35 प्रतिशत भुगतान कर चुकी है। इसके अलावा कर्मचारियों के वेतन आयोग के 8,000 करोड़ रुपये के बकाए भी साफ किए गए हैं।

केंद्र से मिलने वाली ग्रांट में कमी

चालू वित्तीय वर्ष (अप्रैल-जनवरी) के पहले 10 महीनों के वित्तीय संकेत बताते हैं कि केंद्र से मिलने वाली ग्रांट में भी कमी आई है। वित्त मंत्री के अनुसार, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 72,340 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजा सेस प्राप्त हुआ था, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अब तक केवल 27,832 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं।

राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में सरकार के लिए राजकोषीय संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

यह भी देखें : आम आदमी पार्टी द्वारा सरकारी बसों को अपने रंग में रगने से सियासी घमासान