मुंबई, 11 मार्च : शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 4 पैसे की गिरावट के साथ 91.89 पर पहुंच गया। विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही पूंजी निकासी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से धन निकालने के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भी मुद्रा बाजार को प्रभावित किया है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी और डॉलर के कमजोर होने से रुपये को ज्यादा गिरावट से कुछ हद तक सहारा मिला है। अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.92 पर खुला था, लेकिन बाद में थोड़ा संभलकर 91.89 पर स्थिर हो गया।
रुपये को संभालने के लिए आरबीआई सक्रिय
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की लगातार गिरावट को रोकने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है। हाल ही में रुपया 92.19 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन आरबीआई के हस्तक्षेप के कारण यह फिर से कुछ संभलने में सफल रहा। Finrex Treasury Advisors के अनिल कुमार भंसाली के अनुसार आरबीआई 92.00 के स्तर को पार होने से रोकने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक आज रुपये के 91.50 से 92.10 के बीच रहने की संभावना है।
शेयर बाजार में भी हल्की गिरावट
इस बीच घरेलू शेयर बाजार में भी हल्की कमजोरी देखी गई, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
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