चंडीगढ़, 4 अप्रैल : पंजाब में आढ़तियों की हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने नई रणनीति अपनाई है। अब राज्य सरकार पेंडू सहकारी सभाओं को भी आढ़त (कमीशन एजेंट) के काम में उतारने की तैयारी कर रही है, जिसे आढ़तियों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग को निर्देश दिए हैं कि ऐसी पेंडू सहकारी सभाओं की सूची तैयार की जाए, जिन्हें आढ़त का काम सौंपा जा सकता है। इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है।
1 अप्रैल से जारी है हड़ताल
Federation of Arhtiyas Association of Punjab के नेतृत्व में आढ़तियों ने 1 अप्रैल से हड़ताल शुरू कर रखी है। उनकी मुख्य मांग 2.5 प्रतिशत आढ़त (कमीशन) बढ़ाने की है। हाल ही में आढ़तियों का एक प्रतिनिधिमंडल हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini से भी मिला था। इसके बाद भगवंत मान ने आढ़तियों को हरियाणा में कारोबार करने की खुली छूट देने की बात कही थी।
सरकार नहीं लेना चाहती कोई जोखिम
‘आप’ सरकार के कार्यकाल में यह गेहूं की आखिरी खरीद मानी जा रही है, इसलिए सरकार खरीद व्यवस्था में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि पंजाब हित में काम करने वाले आढ़तियों के लिए प्रोत्साहन नीति तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान पहले ही मौसम की मार झेल रहे हैं, इसलिए उनकी फसल की खरीद में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।
सहकारी सभाओं की भूमिका बढ़ेगी
पंजाब में इस समय लगभग 3,520 पेंडू सहकारी सभाएं हैं, जिनमें से कई पहले से ही आढ़त का काम कर रही हैं। सरकार अब इन्हें और सक्रिय भूमिका देने की योजना बना रही है। पेंडू सहकारी सभाओं के कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बहादर सिंह ने इस कदम को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि इससे सहकारी संस्थाओं को वित्तीय स्थिरता मिलेगी, लेकिन साथ ही सरकार को बुनियादी ढांचा उपलब्ध करवाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
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