April 14, 2026

वेब सीरीज़ ‘चिरैया’ : मैरिटल रेप जैसे विषय पर देशभर में छिड़ी बहस

वेब सीरीज़ ‘चिरैया’ : मैरिटल रेप जैसे...

मुम्बई, 14 अप्रैल : हाल ही में रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ ‘चिरैया’ ने भारत में मैरिटल रेप (पत्नी के साथ जबरन संबंध) जैसे संवेदनशील और विवादित मुद्दे को केंद्र में लाकर एक नई बहस छेड़ दी है। यह ऐसा विषय है जिसे भारतीय कानून और समाज लंबे समय से पूरी तरह अपराध के रूप में स्वीकार करने में हिचकिचाता रहा है। यह सीरीज़ जियोहॉटस्टार पर लॉन्च होते ही लाखों दर्शकों तक पहुंची और प्लेटफॉर्म की हालिया सबसे चर्चित हिंदी सीरीज़ बन गई। दर्शकों के साथ-साथ मीडिया समीक्षकों ने भी इसकी सराहना की है, खासकर इसलिए कि यह एक ऐसे मुद्दे को सामने लाती है जिसे अक्सर समाज में दबा दिया जाता है।

सीरीज़ के रिलीज़ होने के बाद सोशल मीडिया पर महिलाओं के अधिकार, विवाह में सहमति (consent) और पुरुषों की मानसिकता को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। जहां एक वर्ग इसे जागरूकता फैलाने वाला कदम मान रहा है, वहीं कुछ लोग इसे ‘पुरुष विरोधी’ बताकर इसकी आलोचना भी कर रहे हैं।

आलोचकों की आपत्ति

कुछ आलोचकों का कहना है कि यह सीरीज़ विवाह संस्था की पवित्रता को कमजोर करने की कोशिश करती है। उनका मानना है कि इस तरह के विषयों को प्रस्तुत करने से पारंपरिक मूल्यों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। सीरीज़ की कहानी लेखिका दिवी निधि शर्मा के अनुसार, ‘चिरैया’ दो महिलाओं कमलेश और पूजा के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। कमलेश (दिव्या दत्ता): एक पारंपरिक सोच वाली मध्यमवर्गीय गृहिणी, जो मानती हैं कि महिलाओं की भूमिका घर और रसोई तक सीमित है। पूजा (प्रसन्ना बिष्ट): एक शिक्षित और जागरूक महिला, जो समानता और अपने अधिकारों के लिए खड़ी रहती है।

नई और पुरानी सोच का प्रतिनिधित्व

कहानी में इन दोनों किरदारों के जरिए समाज में मौजूद दो अलग-अलग विचारधाराओं—पारंपरिक और आधुनिक—को दिखाया गया है। उनके बीच का वैचारिक संघर्ष ही सीरीज़ का मुख्य आधार बनता है। ‘चिरैया’ केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के उन पहलुओं को सामने लाने की कोशिश है जिन पर खुलकर बात नहीं होती। यही वजह है कि यह सीरीज़ दर्शकों के बीच चर्चा और विचार-विमर्श का केंद्र बन गई है।