April 16, 2026

टीसीएस यौन शोषण मामले में जांच तेज, बुल्डोजर एक्शन की मांग

टीसीएस यौन शोषण मामले में जांच...

मुम्बई, 16 अप्रैल : राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट में महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन शोषण के मामलों का गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने इस पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है, जो 18 अप्रैल को नासिक स्थित केंद्र का दौरा करेगी। आयोग द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह टीम मौके पर जाकर हालात का जायजा लेगी और संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा करेगी। समिति को 10 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

9 एफआईआर दर्ज, अंडरकवर ऑपरेशन में खुलासा

मामले में 25 मार्च से अब तक यौन शोषण और धार्मिक दबाव से जुड़े 9 एफआईआर दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार, फरवरी के मध्य से करीब 40 दिनों तक चलाए गए एक गुप्त (अंडरकवर) ऑपरेशन में इन गंभीर आरोपों की पुष्टि हुई है। जांच में यौन शोषण, दुष्कर्म और वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा महिला कर्मचारियों पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने अब तक 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक एचआर मैनेजर पुलिस रिमांड पर है, जिस पर पीड़िता की शिकायत को नजरअंदाज करने का आरोप है।

जांच कमेटी में कौन शामिल

इस जांच समिति में साधना जाधव, बी.के. सिन्हा, मोनिका अरोड़ा और आयोग की वरिष्ठ समन्वयक लीलाबती शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि टीम पीड़ितों, पुलिस और कंपनी प्रतिनिधियों से बातचीत के अलावा जरूरत पड़ने पर अन्य स्थानों पर भी जांच कर सकती है। वहीं, एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि कंपनी इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और आंतरिक जांच जारी है। इसके साथ ही नासिक कलेक्टर कार्यालय ने POSH अधिनियम 2013 के तहत समानांतर जांच शुरू कर दी है, ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

दोषियों के घरों पर बुल्डोजर एक्शन की मांग

इस बीच भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि अमरावती की तर्ज पर नासिक में भी आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि एक प्रतिष्ठित कंपनी में महिलाओं के साथ अन्याय, जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश, मांसाहारी भोजन के लिए मजबूर करना और विशेष प्रार्थनाओं के लिए दबाव बनाना बेहद गंभीर मामला है।

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