नई दिल्ली, 17 अप्रैल: देश में परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल को लेकर लोकसभा में जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सांसद इस बिल के साथ महिला आरक्षण की वकालत कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा में परिसीमन बिल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इस बिल के जरिए सरकार का मकसद सही नहीं लग रहा।
चुनाव से जोड़कर उठाए सवाल
बादल ने सवाल उठाते हुए कहा कि 2023 में महिला आरक्षण बिल लाया गया था, लेकिन तब इसे लागू नहीं किया गया। अब 2026 में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों के मद्देनजर इसे फिर से क्यों लाया जा रहा है?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह बिल बिना किसी व्यापक चर्चा और सहमति के पेश किया है। उन्होंने पूछा कि अगर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है, तो इसे मौजूदा लोकसभा में ही क्यों लागू नहीं किया जा रहा।
परिसीमन बिल का विरोध जारी
हरसिमरत कौर बादल ने साफ कहा कि उनकी पार्टी परिसीमन बिल का समर्थन नहीं करती। उनका मानना है कि लोकतंत्र में सभी को बराबर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और यह बिल उस सिद्धांत के खिलाफ है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हर चुनाव के समय महिलाओं को याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन सरकार अपने लक्ष्य को बदल रही है।
तुरंत लागू करने की मांग
बादल ने मांग की कि महिला आरक्षण को बिना परिसीमन के, मौजूदा संसद की संरचना में ही लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि वे खुद बिना किसी आरक्षण के संसद तक पहुंची हैं और महिलाओं को उनका हक तुरंत मिलना चाहिए।
इस मुद्दे पर संसद में बहस लगातार जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

More Stories
महिला आरक्षण अधिनियम-2023 लागू, केंद्र सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन
हिन्द महासागर में ऑस्ट्रेलिया का अहम रक्षा साझेदार बनेगा भारत
नासिक TCS मामला : धर्मांतरण और उत्पीड़न का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा