चंडीगढ़, 11 मई 2026: पंजाब सरकार के शिक्षा सुधारों की पुष्टि हुई है। ग्रामीण छात्रों ने 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में अपने शहरी समकक्षों से बेहतर प्रदर्शन किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पास होने की दर 95.35% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 92.98% थी।
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस परिणाम की सराहना करते हुए इसे इस बात का प्रमाण बताया कि ‘शिक्षा क्रांति’ ज़मीनी स्तर पर अपना असर दिखा रही है।
सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जैतो (फरीदकोट) की हरलीन शर्मा ने 650 में से 646 अंक (99.38%) प्राप्त कर पूरे पंजाब में टॉप किया। बेहद कड़े मुकाबले में, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, चनाउली बस्सी (रूपनगर) की मणिमहेश शर्मा ने 650 में से 645 अंक (99.23%) प्राप्त कर दूसरा स्थान हासिल किया। श्री गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल, चीफ़ खालसा दीवान, मॉडल टाउन, होशियारपुर की रिया रानी ने 650 में से 645 अंक (99.23%) प्राप्त कर तीसरा स्थान पाया।
हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में 2,69,505 छात्र शामिल हुए, जिनमें से 2,54,744 उत्तीर्ण हुए; इसके साथ ही कुल पास प्रतिशत 94.52% रहा। ग्रामीण छात्रों ने अपने शहरी साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया। ग्रामीण क्षेत्रों से 1,74,958 छात्र परीक्षा में बैठे, जिनमें से 1,66,830 उत्तीर्ण हुए, जिससे पास होने की दर 95.35% रही। शहरी क्षेत्रों में 94,547 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 87,914 उत्तीर्ण हुए, जहाँ पास प्रतिशत 92.98% दर्ज किया गया।
बैंस ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच 2.3 प्रतिशत अंकों से अधिक का यह अंतर, पिछली प्रवृत्तियों में आए एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है। पहले अक्सर शहरी क्षेत्र ही आगे रहते थे। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय शिक्षा के बुनियादी ढांचे में किए गए केंद्रित निवेश और शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण को दिया। उन्होंने आगे कहा, “यह महज़ एक परिणाम-पत्र नहीं है, बल्कि यह उस सरकार का रिपोर्ट कार्ड है जो विशेषाधिकारों में नहीं, बल्कि अवसरों में विश्वास रखती है।”
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