कनाडा, 31 अगस्त : भारत और कनाडा ने एक साथ अपने नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की घोषणा की है, जो संबंधों में एक नई शुरुआत का संकेत है। खालिस्तान विवाद और राजनीतिक तनाव के कारण हाल के वर्षों में ठंडे पड़े संबंध अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं।
राजनयिकों की यह नियुक्ति सिर्फ़ एक औपचारिक बदलाव नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत और कनाडा रिश्तों में आई दरार को पीछे छोड़कर एक नई साझेदारी की ओर बढ़ना चाहते हैं। ट्रूडो युग की छाया धीरे-धीरे छंट रही है और दोनों देश अब व्यावहारिकता और साझा हितों के आधार पर आगे बढ़ते नज़र आ रहे हैं।
रिश्तों को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम
दरअसल, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत कई बार टूटने की कगार पर पहुँच गई थी। 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था।
भारत का दृष्टिकोण
भारत ने साफ़ संदेश दिया है कि वह कनाडा के साथ संबंध सामान्य करना चाहता है, लेकिन खालिस्तानी गतिविधियों पर कोई समझौता नहीं होगा। नई नियुक्ति इस बात का संकेत है कि दिल्ली अब ओटावा के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।
कनाडा का दृष्टिकोण
कनाडा के लिए, भारत न केवल एक रणनीतिक साझेदार है, बल्कि उसके सबसे बड़े आप्रवासी समुदाय का घर भी है। भारतीय छात्रों और पेशेवरों की बढ़ती संख्या कनाडा की अर्थव्यवस्था और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्नी सरकार इस असंतोष को दूर करके संबंधों को बेहतर बनाना चाहती है।

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