July 1, 2026

अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उमड़ा लाखों लोगों का हुजूम

अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर...

वाशिंगटन डी.सी., 29 मार्च : ईरान-अमेरिका-इजराइल जंग का सेक अब अमेरिका में भी लगने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के विरोध में यहां हुई ‘नो किंगस रैली’ में लाखों लोगो ं(लगभग 80 लाख) ने सडक़ों पर उतर कर रोष प्रदर्शन किए। जानकारी के अनुसार अमेरिकी लोगों ने राष्ट्रपति टं्रप की नीतियों के विरोध में अमेरिका के 50 राज्यों में 3,300 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन किए और डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति के पद से हटाने की जोरदार मांग की।

ट्रम्प प्रशासन की कई नीतियों से असंतुष्ट लोग

सूत्रों के अनुसार अक्टूबर में हुए पिछले नो किंग्स प्रदर्शनों की तुलना में इस बार करीब 10 लाख ज्यादा लोग शामिल हुए और लगभग 600 ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रदर्शन कर रहे व्यक्तियों का कहना है कि वे ट्रम्प प्रशासन की कई नीतियों से असंतुष्ट हैं। उनका मुख्य गुस्सा ईरान के साथ बढ़ते तनाव, कड़े आव्रजन नियमों और बढ़ती महंगाई के प्रति है। विभिन्न स्थानों पर लोगों ने ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के खिलाफ पोस्टर प्रदर्शित किए और उनकी पद से हटाने की मांग की।

अब तक, ट्रम्प के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर तीन बड़े नो किंग्स प्रदर्शन आयोजित किए जा चुके हैं। पहला महत्वपूर्ण प्रदर्शन जून 2025 में हुआ, इसके बाद अक्टूबर 2025 में दूसरा प्रदर्शन आयोजित किया गया, और तीसरा प्रदर्शन 28 मार्च को संपन्न हुआ। इन प्रदर्शनों ने सरकार की नीतियों के प्रति असंतोष को स्पष्ट रूप से उजागर किया है।

फर्क नहीं पड़ता : व्हाइट हाऊस

व्हाइट हाउस ने हो रहे प्रदर्शनों पर बोला की इनका प्रदर्शनों का आम जनता पर इनका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने निर्णयों को देश की मजबूती के लिए आवश्यक बताया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे ‘राजा’ नहीं हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।

ट्रम्प के खिलाफ केवल अमेरिका में ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी असंतोष का प्रदर्शन देखने को मिला है। पेरिस, लंदन और लिस्बन जैसे प्रमुख शहरों में नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर ट्रम्प के खिलाफ आवाज उठाई और उन्हें पद से हटाने की मांग की। यह प्रदर्शनों का सिलसिला दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर ट्रम्प की नीतियों और उनके कार्यों के प्रति असहमति बढ़ रही है।