चंडीगढ़, 22 अप्रैल : पंजाब में इस बार (खरीफ) फसल के दौरान खाद की किल्लत पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। पंजाब में यूरिया की सप्लाई पर पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव का असर देखने को मिल रहा है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई है। राज्य में साऊनी फसल के लिए करीब 16 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होगी, लेकिन मध्य मार्च तक सिर्फ 4.80 लाख मीट्रिक टन ही उपलब्ध हो पाया है। यह अंतर आने वाले समय में बड़ी समस्या बन सकता है।
सहकारी समितियों पर निर्भर आपूर्ति
पंजाब में कुल 3520 ग्रामीण सहकारी समितियां हैं, जिनमें 75% खाद की सप्लाई मार्कफेड द्वारा और 25% इफको के जरिए की जाती है। अब तक मार्कफेड ने करीब 2 लाख मीट्रिक टन और इफको ने लगभग 1.5 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया है। विशेषज्ञों के अनुसार, धान (पैडी) की बुवाई के साथ ही 15 जून से यूरिया की मांग तेजी से बढ़ेगी। मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि उस समय तक आपूर्ति और मांग के बीच बड़ा अंतर हो सकता है।
ग्रामीण सहकारी समितियों के कर्मचारियों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार शुरुआती सप्लाई बेहतर है, लेकिन जरूरत के मुकाबले करीब 30% भंडार अभी भी कम है। कई समितियों में सिर्फ एक-एक ट्रॉली यूरिया ही पहुंच पाया है।
किसानों को हो रही परेशानी
किसानों का कहना है कि उन्हें यूरिया हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कुछ जगहों पर डीलर यूरिया के साथ अन्य उत्पाद जैसे कीटनाशक और नैनो यूरिया खरीदने का दबाव भी बना रहे हैं। कई सहकारी समितियों में उपलब्ध खाद का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। कृषि विभाग ने अधिकारियों को बिक्री पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं ताकि कालाबाजारी या कृत्रिम कमी को रोका जा सके।
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