April 15, 2026

भाखड़ा बोर्ड में पंजाब की स्थायी सदस्यता खत्म, केंद्र–राज्य टकराव तेज

भाखड़ा बोर्ड में पंजाब की स्थायी सदस्यता...

चंडीगढ़, 15 अप्रैल : भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में पंजाब और हरियाणा की स्थायी सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद एक बार फिर केंद्र और राज्यों के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। केंद्र सरकार के इस फैसले का पंजाब की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने कड़ा विरोध किया है। केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने विसाखी के मौके पर अंतिम नोटिफिकेशन जारी करते हुए भाखड़ा बोर्ड में पंजाब और हरियाणा की स्थायी सदस्यता खत्म कर दी। यह मुद्दा पिछले चार वर्षों से चर्चा में था और अब इसे औपचारिक रूप दे दिया गया है।

पुरानी परंपरा में हुआ बड़ा बदलाव

अब तक चली आ रही परंपरा के अनुसार बोर्ड में मेंबर (पावर) हमेशा पंजाब से नियुक्त किया जाता था, जबकि मेंबर (सिंचाई) हरियाणा से होता था। नई व्यवस्था के तहत अब यह जरूरी नहीं रहेगा कि इन पदों पर नियुक्ति केवल पंजाब या हरियाणा से ही हो। इस बदलाव की प्रक्रिया 23 फरवरी 2022 को शुरू हुई थी, जब केंद्र ने ‘भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड रूल्स-1974’ में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया था। पंजाब ने उस समय इस फैसले का कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद सितंबर 2025 में संशोधित ड्राफ्ट जारी कर राज्यों से सुझाव मांगे गए।

पंजाब सरकार की आपत्तियों के बावजूद केंद्र ने अब ‘भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (संशोधन) नियम-2026’ लागू कर दिए हैं। हालांकि नए नियमों के तहत पंजाब और हरियाणा को सदस्य चयन में प्राथमिकता देने की बात कही गई है, लेकिन स्थायी प्रतिनिधित्व समाप्त कर दिया गया है।

राजस्थान और हिमाचल को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी

केंद्र सरकार लंबे समय से राजस्थान और हिमाचल प्रदेश को भी बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने की दिशा में काम कर रही थी। नए नियम इसी दिशा में एक कदम माने जा रहे हैं। इस फैसले के खिलाफ पंजाब की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका कहना है कि यह राज्य के जल और बिजली अधिकारों पर सीधा हमला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में केंद्र और पंजाब के बीच विवाद को और बढ़ा सकता है, खासकर जल बंटवारे और बिजली प्रबंधन के मुद्दों पर।