चंडीगढ़, 14 अप्रैल : आउटसोर्सिंग व्यवस्थाओं के तहत वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि केवल कागजी समझौतों के आधार पर कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक किसी सरकारी संस्था के नियंत्रण और निगरानी में काम करता है, तो उसे उस संस्था का वास्तविक कर्मचारी माना जाएगा।
छह हफ्तों में सेवाएं नियमित करने के आदेश
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की बेंच ने बठिंडा नगर निगम को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की सेवाएं छह सप्ताह के भीतर नियमित की जाएं। ऐसा न करने पर उन्हें स्वतः ही नियमित माना जाएगा। अदालत ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां केवल एक माध्यम हैं और इनके जरिए वास्तविक रोजगार संबंधों को छिपाया नहीं जा सकता। वास्तविक नियोक्ता वही होता है जो काम पर नियंत्रण रखता है।
ठेकेदारी व्यवस्थाओं पर सख्त टिप्पणी
फैसले में अदालत ने ठेकेदारी व्यवस्थाओं पर भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि 2016 से पहले तीन साल की लगातार सेवा करने वाले कर्मचारी नियमित किए जाने के हकदार हैं। अदालत ने राज्य सरकारों द्वारा स्थायी पद होने के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी या आउटसोर्स आधार पर रखने की प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन बताया। अदालत ने यह भी कहा कि लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारी अनुभव और योग्यता हासिल कर लेते हैं, जिससे उनके नियमित होने का दावा और मजबूत हो जाता है।
यह भी देखें : मोहाली-राजपुरा रेल परियोजना के लिए गंभीर नहीं पंजाब सरकार : रेल मंत्री

More Stories
मोहाली-राजपुरा रेल परियोजना के लिए गंभीर नहीं पंजाब सरकार : रेल मंत्री
विधानसभा में ‘जगत जोत’ बिल पास, कानूनी और राजनीतिक सवाल बरकरार
केंद्र की टीम द्वारा धूरी अनाज मंडी का दौरा