नई दिल्ली, 21 जनवरी : मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अपने साथी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए। अदालत के अनुसार यह महिलाओं को कानूनी और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक है।
अदालत की यह टिप्पणी विवाह का झूठा वादा कर एक महिला के यौन शोषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई।
क्या है पूरा मामला?
मद्रास हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जो एक महिला के साथ विवाह का झूठा वादा कर लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। इस दौरान उसने महिला के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में उससे शादी करने से इनकार कर दिया।
यह मामला पहले तिरुचिरापल्ली ज़िले के मणप्पाराई ऑल वुमन पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अदालत में अग्रिम जमानत की मांग की थी।
जमानत याचिका खारिज
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति एस. श्रीमति ने पुरुष साथी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा,
“आज के समय में अदालत का यह कर्तव्य है कि वह सबसे कमजोर पक्ष, यानी महिला, के हितों की रक्षा करे।”
अदालत ने यह भी माना कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाएं कानूनी रूप से अधिक असुरक्षित स्थिति में होती हैं और कई बार पुरुष इस स्थिति का लाभ उठाकर उनका शारीरिक शोषण करते हैं।
IPC की धारा 69 लागू
अदालत ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 69 लागू की। इस धारा के तहत विवाह का धोखा या झूठा वादा कर बनाए गए शारीरिक संबंध को अपराध माना गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप में पुरुष साथी कानून के दायरे से बाहर नहीं जा सकते। साथ ही कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला धारा 69 के अंतर्गत आता है, जिसके तहत आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

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