नई दिल्ली, 28 फरवरी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 फरवरी को ईरान को चेतावनी दी थी कि उसके पास समझौता करने के लिए 10 से 15 दिन हैं। यदि इस अवधि में कोई समझौता नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप की चेतावनी की 10 दिन की समय-सीमा समाप्त होते ही अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी के ठीक 10 दिन बाद शनिवार को ईरान की राजधानी Tehran में अमेरिका और Israel ने संयुक्त हमला किया। यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के कार्यालय के नजदीक हुआ।
पहले से मजबूत की गई थी सैन्य तैयारी
ईरान पर हमले से काफी पहले ही अमेरिका ने उसके चारों ओर अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर ली थी। अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए इस हमले ने बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है।
डेडलाइन नजदीक आते ही बढ़ी चिंता
जैसे-जैसे ट्रंप द्वारा तय 10 दिन की समय-सीमा खत्म होने लगी, क्षेत्रीय चिंताएं बढ़ती गईं। रूस, यूरोपीय सरकारों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने संयम बरतने की अपील की थी। विश्लेषकों का मानना था कि यदि ट्रंप की डेडलाइन बिना किसी समझौते के खत्म होती है तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
समय-सीमा समाप्त होते ही तेहरान में इज़राइल और अमेरिका ने हमले शुरू कर दिए। दोनों देशों ने इसे ‘प्रीवेंटीव मिसाइल स्ट्राइक’ बताया, जिसका उद्देश्य ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना है।
ईरान पर हमला क्यों हुआ?
2025 में ईरान-इज़राइल के बीच बढ़े तनाव और ईरान समर्थित समूहों के साथ कई झड़पों के बाद से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए थे। इज़राइली नेतृत्व ने जनवरी में ही ईरान को चेतावनी दी थी कि उसकी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को अनियंत्रित तरीके से बढ़ने नहीं दिया जाएगा।
चेतावनियों के बावजूद ईरान ने संवेदनशील परमाणु और मिसाइल गतिविधियां जारी रखीं। बार-बार चेतावनी के बाद भी रुख न बदलने पर अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान पर हमला कर दिया। इस कार्रवाई के बाद मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है।

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