नई दिल्ली, 7 जुलाई : तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अपना 90वां जन्मदिन मनाते हुए दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी को लेकर बड़ा ऐलान किया, जिसके बाद चीन की ओर से तीखी प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी। इसके साथ ही अब दलाई लामा को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न देने की तैयारी हो रही है।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सांसदों के ऑल पार्टी फोरम ने दलाई लामा को भारत रत्न देने का सुझाव दिया है। इतना ही नहीं, इस प्रस्ताव पर 80 सांसदों ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इसे जल्द ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है।
एमपी फोरम की सीटीए से मुलाकात
तिब्बत पर सर्वदलीय भारतीय संसदीय मंच ने संयोजक भर्तृहरि मेहताब के नेतृत्व में कई बार केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) से मुलाकात की है। इसके साथ ही राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार भी इस पहल में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में सुजीत कुमार ने कहा- 80 सांसदों ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। अभी 20 और सांसदों के हस्ताक्षर मिलने बाकी हैं। 100 सांसदों के हस्ताक्षर मिलने के बाद यह प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
चीन को दिया गया करारा जवाब
दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर चीन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुजीत कुमार ने कहा कि चीन को दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने का कोई अधिकार नहीं है। मंच ने तिब्बत के मुद्दे को विभिन्न मंचों पर उठाने का निर्णय लिया है। इस पर संसद में भी चर्चा होगी।
उत्तराधिकार को लेकर चीन की बढ़ती चिंता
आपको बता दें कि 2 जुलाई को दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करते हुए यह अधिकार गादेन फोडरंग ट्रस्ट को सौंप दिया था, जिसकी स्थापना खुद दलाई लामा ने की थी, लेकिन चीन ने उनके इस फैसले पर आपत्ति जताई और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
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