नई दिल्ली, 30 अप्रैल : पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इस स्थिति के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की बिक्री पर कंपनियों को करीब ₹14 प्रति लीटर और डीज़ल पर ₹18 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू कीमतों में बदलाव न होने से कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हुआ है।
एलपीजी पर भी नुकसान का खतरा
पेट्रोल और डीज़ल के अलावा रसोई गैस (एलपीजी) पर भी भारी घाटे की आशंका जताई गई है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में कुल नुकसान करीब ₹80,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। रेटिंग एजेंसी ‘इकरा’ के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें 120-125 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन आगे भी नकारात्मक रह सकता है।
इकरा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के बावजूद खुदरा दरों में स्थिरता के कारण पेट्रोलियम कंपनियों की लाभ कमाने की क्षमता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सरकार या कंपनियों को कीमतों में संशोधन करना पड़ सकता है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।

More Stories
निलंबित डीआईजी भुल्लर के ठिकानों पर ईडी के छापे, दस्तावेज़ जब्त
काशी दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने 6,350 करोड़ की परियोजनाओं का किया लोकार्पण
पश्चिम बंगाल फेज-2 के लिए 142 सीटों पर वोटिंग शुरू, सुरक्षा कड़ी