नई दिल्ली, 17 अप्रैल : महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को गुरुवार को लोकसभा में पेश किया गया, जिसके साथ ही राजनीतिक गणित में हलचल तेज हो गई है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को पेश करने से पहले सदन में वोटों का विभाजन किया गया।
सरकार की राह मुश्किल
इस प्रक्रिया में 436 सांसदों में से 185 ने विरोध में वोट दिया, जो कि कुल सांसदों का 42% से अधिक है। यह आंकड़ा सरकार के लिए चिंताजनक साबित हो सकता है, क्योंकि यह आगामी मतदान के संदर्भ में उनकी स्थिति को कमजोर करता है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि विधेयकों के प्रति सदन में असहमति की भावना बढ़ रही है, जो सरकार की रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर प्रभाव डाल सकती है। महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक पर आज, यानी शुक्रवार को चर्चा समाप्त होगी, जिसके बाद इस पर मत विभाजन किया जाएगा। इस विधेयक के लिए मत विभाजन का समय शाम चार बजे निर्धारित किया गया है।
दो-तिहाई बहुमत की चुनौती
आमतौर पर लोकसभा में प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित किया जाता है, लेकिन जब किसी निर्णय पर विवाद उत्पन्न होता है, तब ‘डिवीजन’ या मत विभाजन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में ऑटोमेटिक वोट रिकॉर्डर सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिसमें सांसद अपने वोट को ‘हां’, ‘ना’ या ‘अनुपस्थित’ के रूप में दर्ज करते हैं। संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। वर्तमान में सदन की प्रभावी संख्या 540 है, इसलिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में यह आंकड़ा सरकार के लिए हासिल करना आसान नहीं दिख रहा है, खासकर यदि विपक्ष अपने विरोध के आंकड़े बनाए रखता है।

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