पटियाला, 15 अप्रैल : इस बार गेहूं का सीजन तेजी पकड़ने का नाम नहीं ले रहा। हालांकि खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बावजूद भी केवल नाममात्र की खरीद हो रही है, जिसके कारण मंडियां पूरी तरह भर चुकी हैं। सोशल मीडिया से लेकर किसान यूनियनों तक रोष जताने के बावजूद खरीद में कोई तेजी नहीं आ रही। पंजाब की खरीद एजेंसियां सीधे तौर पर केंद्र की ओर देख रही हैं कि केंद्र सरकार लस्टर लॉस, नमी या बारिश के कारण हुए नुकसान पर कब राहत का ऐलान करेगी।
पिछले कई दिनों से केंद्र की टीमें अलग-अलग मंडियों में जाकर सैंपलिंग कर रही हैं और जांच के लिए भेज रही हैं, लेकिन अभी तक कोई नतीजा सामने नहीं आया। इसी कारण पंजाब की एजेंसियां केंद्र की राहत का इंतजार कर रही हैं, जिससे मंडियों में गेहूं की खरीद बहुत धीमी है और मंडियां पूरी तरह भर चुकी हैं।
बड़ी मंडियों से लेकर छोटे खरीद केंद्रों तक किसी भी जगह गेहूं रखने की जगह नहीं बची है। हालांकि प्रशासन की ओर से थोड़ी-बहुत बोली लगाकर खरीद जारी रखने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। दूसरी ओर किसान यूनियनों ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद खरीद में तेजी नहीं आई है।
मापदंडों में छूट के बिना खरीद असंभव: तालमेल समिति
इस संबंध में जब खरीद एजेंसियों की तालमेल समिति के नेताओं विनय कुमार (प्रदेश अध्यक्ष, पंजाब वेयरहाउस), सतिंदर सिंह बराड़ (प्रदेश अध्यक्ष, पनसप कर्मचारी यूनियन), हरजीत सिंह खेड़ी (प्रदेश अध्यक्ष, पनग्रेन) और जसबीर सिंह रखड़ा (प्रदेश अध्यक्ष, मार्कफेड कर्मचारी यूनियन) से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मंडियों में आ रही गेहूं सरकारी मापदंडों पर खरी नहीं उतर रही है, जिसे एफएक्यू मानकों के तहत खरीदना संभव नहीं है।
सरकार द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जो गेहूं निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती, उसकी खरीद न की जाए। यदि कोई खरीद करता है तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार मापदंडों में ढील नहीं देती, तब तक खरीद संभव नहीं है। बेमौसमी बारिश के कारण खराब हुई और लस्टर लॉस वाली गेहूं लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण में नहीं रह सकती और न ही उसमें निर्धारित मानकों के अनुसार सुधार हो सकता है। बाद में इसका खामियाजा करोड़ों रुपये की चार्जशीट के रूप में संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को भुगतना पड़ सकता है।
डीसी दफ्तरों के सामने प्रदर्शन
पंजाब की मंडियों में गेहूं की खरीद न होने के कारण किसान संगठनों ने गंभीर नोटिस लेते हुए भगवंत मान सरकार पर आरोप लगाया कि वह किसानों की बेटे की तरह पाली फसल को जानबूझकर मंडियों में खराब होने दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल पहले ही बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हो चुकी है और बाकी नुकसान सरकार ने मंडियों में फसल को रोककर पूरा कर दिया है। उन्होंने घोषणा की कि किसान यूनियन उगराहां 16 अप्रैल को पूरे पंजाब में डीसी दफ्तरों के सामने विरोध प्रदर्शन करेगी।
दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि केंद्र से गेहूं के मापदंड जांचने के लिए टीम आएगी। आढ़ती एसोसिएशन, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष जसविंदर सिंह राणा ने केंद्र सरकार से मांग की कि गेहूं खरीद के मापदंडों में तुरंत छूट दी जाए, ताकि किसानों की सुनहरी फसल खरीदी जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आने वाले दिनों में खरीद शुरू नहीं हुई तो पंजाब का किसान सड़कों पर उतर सकता है, जिसका खामियाजा सरकार को आने वाले विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने भले ही राजस्थान को गेहूं के मापदंडों में छूट दे दी है, लेकिन पंजाब को यह छूट कब मिलेगी, यह अभी समय ही बताएगा।
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