चंडीगढ़, 17 अप्रैल : National Green Tribunal (एनजीटी) ने पंजाब सरकार की लो इम्पैक्ट ग्रीन हैबिटैट्स (LIGH) नीति-2025 पर लगी अंतरिम रोक को 21 जुलाई तक बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद जंगलों से जुड़े इलाकों में किसी भी प्रकार की मंजूरी या नियमितीकरण पर फिलहाल पूरी तरह रोक जारी रहेगी। राज्य सरकार ने 7 अप्रैल को नीति में संशोधन करते हुए कुछ प्रावधान हटा दिए, जिनमें फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की मॉनिटरिंग और व्यावसायिक इमारतों से जुड़े नियम शामिल थे। हाउसिंग एवं शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव सुखजीत पाल सिंह ने ट्रिब्यूनल में हलफनामा दाखिल कर संशोधित नीति की प्रति सौंपी।
केंद्र का स्पष्ट रुख
Ministry of Environment, Forest and Climate Change ने अपने हलफनामे में साफ कहा है कि LIGH नीति को संरक्षित वन क्षेत्रों और उनके ईको-सेंसिटिव ज़ोन तक लागू नहीं किया जा सकता। पंजाब सरकार ने Sukhna Wildlife Sanctuary के प्रस्तावित ईको-सेंसिटिव ज़ोन को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट स्थिति नहीं दी है। वन विभाग के अनुसार मोहाली जिले की बड़ी जमीन इस दायरे में आ सकती है।
पर्यावरण प्रेमियों ने नीति में किए गए संशोधनों को कानूनी चुनौती को कमजोर करने की रणनीति बताया है। उनका कहना है कि Shivalik Hills की कंडी बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण, खनन और अन्य गतिविधियों से भूजल स्तर में गिरावट, ढलानों की अस्थिरता और वन्यजीव गलियारों में बाधा आ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
पेटिशनरों का दावा है कि यह नीति T.N. Godavarman Thirumulpad v. Union of India मामले में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करती है और प्रभावशाली लोगों के अवैध फार्महाउस को वैध बनाने का रास्ता खोलती है।
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