चंडीगढ़, 23 अप्रैल : चंडीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसले में Punjab National Bank (PNB) को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी ठहराया है। आयोग ने बैंक को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता महिला को लॉकर से गायब हुए गहनों की कीमत के रूप में 1 करोड़ रुपये अदा करे। इसके साथ ही मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए 1 लाख रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया गया है।
सेक्टर 9-बी, चंडीगढ़ की निवासी बेला प्रसाद का सेक्टर-17 स्थित PNB शाखा में अपनी माता के साथ संयुक्त खाता और दो लॉकर (नंबर 37 और 38) थे। बाद में शाखा के सेक्टर-9 में विलय होने के पश्चात, उन्होंने अपनी माता के निधन के बाद लॉकर नंबर 38 सरेंडर कर दिया और सारा कीमती सामान लॉकर नंबर 37 में स्थानांतरित कर दिया।
2020 में सामने आया चौंकाने वाला सच
साल 2020 में जब बेला प्रसाद लॉकर इस्तेमाल करने बैंक पहुंचीं, तो उन्हें यह जानकर झटका लगा कि बैंक अधिकारियों ने उनका लॉकर तोड़कर किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित कर दिया था। बैंक ने दावा किया कि रिकॉर्ड के अनुसार लॉकर वर्ष 2013 में ही सरेंडर कर दिया गया था। हालांकि, आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बैंक कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि लॉकर तोड़ने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार की गई थी या ग्राहक को पूर्व सूचना दी गई थी।
ग्राहक के पास चाबी होना बना अहम सबूत
शिकायतकर्ता के पास लॉकर की मूल चाबी का होना बैंक के दावों को झूठा साबित करने के लिए पर्याप्त माना गया। आयोग ने इसे एक महत्वपूर्ण सबूत के रूप में स्वीकार किया। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि बैंक लॉकर की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है। पारदर्शिता की कमी और नियमों का उल्लंघन करते हुए ग्राहक की संपत्ति का नुकसान होना सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) है। आयोग ने PNB को आदेश दिया है कि वह बिना देरी के शिकायतकर्ता को निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान करे।

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