चंडीगढ़, 25 अप्रैल: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है।
वहीं शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री के इस कदम को राजनीतिक ड्रामेबाजी करार दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि संविधान के 10वें अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अनुसार सांसदों की सदस्यता पर फैसला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि राष्ट्रपति के।
डॉ. चीमा ने कहा कि यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे इस मामले में नैतिक रूप से कोई ठोस स्टैंड नहीं ले सकते, क्योंकि पहले भी उन्होंने अन्य दलों के विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कराया है।
अकाली नेता ने यह भी पूछा कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के लिए संपन्न लोगों को क्यों चुना, जबकि पंजाब में आम लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई योग्य व्यक्ति मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यदि जवाबदेही की बात की जा रही है, तो जनता को उन विधायकों को भी वापस बुलाने का अधिकार मिलना चाहिए जो अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रतीकात्मक याचिकाएं दाखिल करने के बजाय पार्टी को जनता के बीच जाना चाहिए और यदि लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास है, तो राज्यपाल से नए जनादेश की मांग करनी चाहिए।

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